Friday, May 27, 2016

Jugni



ज़रा बक्श दे
मेरे हम-जाए

जनिजार क्यों
फ़िदा वहां
यहाँ नहीं
तसव्वुर नहीं

वाजिब इश्क़
बेखुदा का नमाज़
दिली मुहब्बत
कुफ्राना नीघमत

तेरे नूर में
मेरे सवेरे बे-आबरू
तेरी इंतज़ार में
मेरे शब की रौनक

जुगनी
तेरी झलक
कुर्बान
चांदनी में धुली मैं

तेरा याराना
मेरी हमनशीं
तेरी ज़िक्र
मेरी बेईमानी


गिरते फ़रिश्ते
अर्श से फर्श
कानून कायदे
जूनून कायम


तेरे तकाज़े जॉइस
तेरा रुतबा आला
ज़रा वक़्त दे
मेरे हमनफस


जानां
जान-ए - जानाँ
यह तमाम
 कायनात में...

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