Thursday, April 30, 2026

Sulah

Akhir Sulah ?

Shikwa Khatm? 

Meri Rutba  Kahan? 

Sirf Tere Gulam 

Shikasth Musallam 

Hassas ki Kya Ehsaas Hain Tujhe

Kathai Gila Naheen Nahin Tujhse 




Compendium

saraab 


तू ही जानता हेँ या रब!
मेरी सरहदें मेरी दूरियां
तो क्यूं देतें हो मुझे
आज़माइशें मुज़लज़ल 
जिनसे जान झूटने  केलिये 
मैंने तुझपे सजदा ही सजदा रहां हू 
खुदाया, तेरा इरादा क्या हेँ?

और तूने क्या किया
जिन झलकते जालों से में दूर भगा
और तेरी ज़ाए में आ पहुंचा
उन जालॉंके मेले में मुझे फसाया

आखिर, ये कौन सी सज़ा हेँ , या इलाही
ये सराब क्यां हेँ?

जब मैंने तुझे ढूँढा
और तेरे पीछे भटका
ख़ुदाया, क्यूं मुझसे दूर जाते हों
या क्या में तुझसे दूर हो रहा हूँ ?

आखिर इस दर्द की दवा क्या हेँ, या इलाही
ये माजरा क्यां हैं ?

मेरी छोटी सी ज़िंदगी में खुशियाँ अदा फरमा दे!
     या  खुदा! मुझपर तेरी बरकत बरसा दे"
    हर दिलों का हाल जान-ने वाला
  खुदाया! मुझसे  खफा क्यूं हो?


تم هی جانتا هے, یا رب 
میری سرحدیں, میری دوریاں
!تو کیوں دےتے ہو مجھے؟ یا رب
 آزمائش مسلسل 
جن سے جان جھوٹنے كےليے
مےنے تجھپے سجدہ ہی سجدہ رها هان
كھدايا ، تیرا ارادہ کیا هے ؟

اور تو نے کیا کیا ، یا رب
جن جھلكتے جالو سے میں دور بھگا
اور تیری ضائع میں آ پہنچا
ان جالكے میلے میں مجھے پھسايا ، یا رب

آخر ، یہ کون سی سزا هے ، یا الہی
یہ سراب كيا هے ؟

جب میں نے تجھے ڈھونڈتا
اور تیرے پیچھے گمراہ ، یا رب
خدايا ، کیوں مجھ سے دور جاتے ہوں
یا کیا ؟ میں تجھ سے دور ہو رہیں ہوں ؟

آخر اس درد کی دوا کیا هے ، یا الہی
یہ ماجرا كيا هے ؟

میری چھوٹی سی زندگی میں خوشی ادا فرما دے ، یا رب !
     یا خدا ! مجھپه  تیری برکت برسا دے "
    ہر دلوں کا حال جان - نے والا یا رب
  خدایا ! مجھ سے خفا کیوں 


Ye Tamannayen Lahaasil Si!

खुशियों का साराब देखते देखते 
ख्वाबों के समुन्दर में तैरते तैरते
ख्वाइशों की बुलंदियों में घुमशुदा
खयालें सरज़मीन की सरहदें पार किये
लेकिन ये तमन्नायें लहासिल सी 

मेरे अरमानों के गुलिस्तान पर
क्यूँ यह ज़िल्लत?
जीने लगा हूँ
जीने दो
मुमकिन तो नहीं
लेकिन उम्मीद की झलक तो सही 
या इलाही! यह कैसी सज़ा हैं?

 अनकही

                        

सरफ़रोशी की तमन्ना अब (भी)  हमारे दिल में हैं *
मर मिटेंगे मुल्क पे क़ुर्बान
जितनी  आपके दिल में
उतनी  मेरे दिल में

मेरा मुल्क
मेरा देश
मेरा क़ौम
मेरा वतन

आज़माओ!
मेरे मुहब्बत-ए - हिन्द को
परखो!
मेरे वफ़ा-ए- हिन्द को
ज़ीना फाड़कर  देखो
कैसा  धड़कता  यह दिल
हमारा  हिन्दोस्तां
हमारा  गुलिस्तां
जिसमे फले फूले हम
हमारी सरज़मीन

फिर कब आ गए, भाई
ये  'तुम' और 'हम'
फिर भी क्यों ,  भाई
शक़ मुझपे
फिर भी क्यों ,  भाई
 नफ्रत मुझसे
फिर भी क्यों ,  भाई
थूकते हैं मुझपे
फिर भी क्यों ,  भाई
नहीं  देते, इज़्ज़त मुझे

नमाज़ी हूँ रोज़ा-पाबंद हूँ
तहज्जुद  गुज़ार हूँ
तो क्या, मेरे हुब - ए - वतन मेरा ईमान   नहीं ?
तो  क्या, मेरा  फ़र्ज़ - ए - मुल्क  मेरी इबादत  नहीं ?


मेरी शान
मेरी आन
मेरी जान
मेरा मान

हर लहज़ा
हर लम्हा
हर कदम
हम साथ-साथ

मत फैलाओ बैर
मत सोचो ,मैं  गैर

हर लहज़ा
हर लम्हा
हर कदम
हम साथ-साथ

सरफ़रोशी की तमन्ना अब (भी) हमारे दिल में हैं *
मर मिटेंगे मुल्क पे क़ुर्बान *
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,*
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है*


Humdum हमदम 

सीं सितारों की झलक में गिरफ़्तार था 

घने धुप में   सूरज से खफा था

तब सवेरे  की उम्मीद  याद नहीं  रही

शाम की तसल्ली भी नज़र नहीं रही 

 टिमटिम  तारे हर रात के मेहमान थे 

 हर दिन मुस्ताखिल मयस्सर सूरज ही था

मेरे मौला, 

तू ने मेरे लिए क्या चुना, वो तो  साबित क़दम 

हमदम ने मूह फेर लिया, सुनसान आसमान तले 


Madaar/
Pairon Tale Zameen Nahi 
Upar Umeed ke Taare Nahi
Munafiq hain Mahshara 
Avval-e-Amal
Muqabla-e-Jannat
Apne Gireban Kam
Paraye Aaib Eham
Tilawat mein Tajweed nahi, Meri Zikr Mukhlis 
Sajada Naayab to Sahi, Ashk bhara Mera Janamaaz
Dil ki Talab, Tujhe  Paane ki Meri Justajoo 
Sayarah Madaar ke Bin
Kashti Langar ke Bin
Aashiq Ishq ke Bin
Musafir Manzil ke Bin
Gunah mein bhi Tu
Sawab mein bhi Tu
Kufr mein bhi Tu
Imaan mein bhi Tu
Mere Aaqa
Mere Khudaya

Maamta-मामता

इधर
मेरे दरवाज़े में
दस्तक देकर
थके हारे सोते मुझे
क्यूँ जगाते हो  तुम ?

उधर
वे सर हिलाती
मस्कुराती
अपने लाडले को सराहती
सुनती अपने औलाद की  दास्ताँ
सात समुन्दर पार
सुनहरे परदेस से
खिलौनों की ढेर समेत
आते उसके  विलायती वालिद के किस्से
मामता में गीली  रोटी  चबाती
उनकी गोद में  सोती
अपने अब्बे के ख़यालों में
उनकी  जिगर की टुकड़ा 

अरे! मुझे क्या इल्म ?
जैसे
उस माँ की ममता की हलावात में
मिटती हैं  उनकी बेवगी की तल्खियाँ
वैसे
मुस्तक़बिल की हर दस्तक में
धुंधलते  मासी के लम्बे फासले
न एहसास  हाल की मसाइल
जागता हर दिन नहायत खुश हाल
सिर्फ  दिखते सुबह के  सितारे
तेरे मुहब्बत के इशारे

तो
उम्मीद भरी लोरियाँ सुनाते
सुलाये  मुझे,
सूरज की पहली किरणों से
जगाये मुझे
फज्र के  ठंडे आब-ए- रवान में
नहलाये मुझे
ऊद और इतर की मश्क से
मेहकाये मुझे
आखिर कहाँ  दुनिया की तमाम मामता ?
तेरी रहमत  के मुकाबले

आखिर, खुदाया  !
तेरे अताओं में
तो क़ाबिल-ए-क़दर
यह  नूर-ए-उम्मीद  ही

न गिला
न शिकवा
तुझसे
मेरा यारा

Qutbi Tara

बेमंज़िल  सफर में
हमदम हमसफ़र
प्यासे मुसाफिर की
आब-ए-तस्कीन
वसी रेगिस्तान
में मेरी  नख्लिस्तान
या क़ुतबी तारा
मेरा यारा

देर तो सही
लेकिन दुरुस्त
कभी गुमराह
पर अभी  मुस्तक़ीम
न गिला
न शिकवा
मेरा यारा
उम्मीद आश्ना तारा
राह दिखा दे मुझे मुस्तक़िल 

Ashk
न गिरेगी अश्कें 
तेरी खातिर 
न फैलाएगा मेरी कश्कोल 
तेरे चार आना के उम्मीद 

izterab-e-Mehtab

हूँ मैं दरबदर
कहाँ मुझे इख्तियार? 
यह कैसी इज़तेराब
जब तुम बनते हो मेहताब

शुक्र हैं खुदा का
हर गुनाह से जुड़ी एक इज़ाफा
घटती इस हुस्न-ए-शब में दिलखशी
बढती एक एहसास-ए-अफसोस

तकलीफ-देह यह इंतेज़ार
उरूब-ए-क़मर वास्ते बेज़ार 
पर बेचैन हूँ मैं मुज़लज़ल
कब तालो-ए-क़मर? 

कभी नयी कभी अधूरी 
कभी हिलाल कभी कामिल
तुम तो आओगे बिनबुलाये वापस
अलबत्ता न रहूँगा मैं बेबस 

हाल वे रब्बा
सोने रब तो बेमुरव्वत 
रहूँगा यह इज़तेराब
जब तुम बनते हो मेहताब

इज़तेराब-मेहताब
Lunar trepidations

Yes, I am in tatters
Do I have any choice to get out of this?
What sort of restlessness is this?
When you become the Moon in my life

Thank God!
Coupled with every wrong is a redemption
Wanes (my) interest in the beauty-of-the-night
Waxes a woeful feeling of regret

Painful is this waiting
Impatient for the moon-set
But I would remain restless (even after this) always
For, When for the (dreaded next) moon-rise?

Sometimes new(-moon) sometimes half (-moon)
Sometimes crescent(-moon) sometimes full(-moon)
You would come back uninvited
But I would be never helpless next time

Oh Lord! (Why is) my condition (like this_? 
Loving Lord doesn't oblige 
Hence this restlessness would continue
When you become moon in my life

مجھدار Majdhaar

मोरा करम 
तोहरा रहम 
मझधार  पे रखत तू मुझे सही 
ज़ेहर- शहद फरक जानत नहीं 
ज़िन्दगी के रोशन सपने दिखावत 
मोहे बंदगी यह मुर्दगी समेत 
बेबस बेज़ार मोरा रूह  खुलावत 
असीम अपार तोहरे रहम की उम्मीद 
मोरा करम 
तोहरा रहम 

موڑا کرم 
تھوھرا رحم 
مجھدار پی رکہت تو  مجھے سہی 
سہار شاد فراک جانت نہیں 
زندگی کے روشن سپنے دکھاوٹ 
موہے بندھاگی یہ مردگی سمیت 
بےبس بیزار موڑاروح  خلوت 
اثیم اپار ٹھرے رحمکی امید 
موڑا کرم 
تھوھرا رحم 
Iltija

मुझे क्या इल्म ?
मैंने  तुझे ही ढूँढा
तू थी मेरी मंज़िल
मुझे तो नहासिल
मेरी ज़ोहद
मेरी मकसद


मुझे क्या हासिल ?
बेतलब बलुतुफ
यह फड़कना फिरना
यह फसना रुलना
बेमौका बेइन्तहा
बेइम्तियाज़  बे-इक़तियार

यह मेरी  फित्रत
न यह मेरी हज़रत
क्या मैं मानूँ ?
यह सही यह गलत
यह होनी यह अनहोनी
मेरी इर्द गिर्द
यह मेरी ज़वाब
या यह मेरी नसीब

न यह ज़ुल्म  मुझपे
तौबा !!न तुम ज़ालिम
न मैं मज़लूम
लेकिन यह शिकवा
मुझसे तू क्यों खफा
वजह मेरी घटती वफ़ा

कैसे इज़हार करू ?
मेरी यह इल्तिजा
यह बेज़ुकूनी बेज़ारी
यह बेकशी बेबसी
तुझपे  क्या असर
तू रूह -ए -संसार

तेरी इक़रार
तेरी इंकार
हर हाल मंज़ूर
मैं मुकम्मल ज़बूर
पर उम्मीद बेशुमार
इस अब्दल की हक़
हर धड़कन की दस्तक

मेरी यह दर-खास्त
तुम्हारे दरवाज़े
मेरी यह इल्तिजा
तेरे पैरों तले

हर मेरा दस्तूर बेअसर न हो जाए ?
हर मेरा फितूर बेमतलब न  हो जाए ?
हर अमल तुझसे क्यों झोड़ती नहीं बरकरार?
हर खता तुझसे क्यों तोड़ती हैं ज़रूर?

यह डोर हलकी सी डोर
यह रास्ता तेरे वास्ता
थी मेरी ख्वाब
मुस्तक़ीम
पर मेरी नसीब
जहन्नुम

रब्बा! यह माजरा क्यां हैं ?
कभी तो पूछो मुद्दे -हाल क्यां हैं ?

मैं तो मुश्ताक़
यह फासले यह फ़िराक
तू  तो बेमुरव्वत
मेरी जूनून हर वक़्त

रब्बा! यह माजरा क्यां हैं ?
कभी तो पूछो मुद्दे -हाल क्यां हैं ?


اِلْتِجا  


مُجھے کْیا اِلْم؟  

مَیننے تُجھے ہی ڈھُونڈھا  
تُو تھی میری منذِل  
مُجھے تو نہاسِل  
میری ذوہد  
میری مکسد  




مُجھے کْیا ہاسِل؟  

بیتلب بلُتُپھ  
یہ پھڑکنا پھِرنا  
یہ پھسنا رُلنا  
بیمَوکا بیءنْتہا  
بیءمْتِیاذبی-ءقتِیار  


یہ میری پھِترت  
ن یہ ایری ہذرت  
کْیا مَیں مانُوں؟  

یہ سہی یہ گلت  
یہ ہونی یہ انہونی  
میری اِرْد گِرْد  
یہ میری جواب  
یا یہ میری نسِیب  


ن یہ ذُلْم مُجھپے  
تَوبا!! ن تُم ذالِم  
ن مَیں مذلُوم  
لیکِن یہ شِکوا  
مُجھسے تُو کْیوں کھپھا  
وجہ میری گھٹتی وفا  


کَیسے اِذہار کرُو؟  

میری یہ اِلْتِجا  
یہ بیذُکُونی بیذاری  
یہ بیکشی بیبسی  
تُمپے کْیا اسر  
تُو میرے رُوہ-ءی-سنسار  


تیری اِقرار  
تیری اِنکار  
ہر ہال منذُور  
مَیں مُکمّل ذبُور  
پر اُمِّید بیشُمار  
اِس ابْدل کی ہق  
ہر دھڑکن کی دسْتک  


میری یہدر-کھاسْت  
تُمھارے درواذے  
میری یہ اِلْتِجا  
تیرے پَیروں ٹیل  


ہر میرا دسْتُور بیاسر ن ہو؟  

ہر میرا پھِتُور بیمتلب ن ہو؟  

ہر امل تُجھسے کْیوں جھوڑتی نہِیں برکرار؟  

ہر کھتا تُجھسے کْیوں توڑتی ہَیں ذرُور؟  



یہ ڈور ہلکی سی ڈور  
یہ راسْتا تیرے واسْتا  
تھی میری کھْواب  
مُسْتقِیم  
پر میری نسِیب  
جہنُّم  


ربّا! یہ ماجرا کْیاں ہَیں؟  

کبھی تو پُوچھو مُدّے-ہال کْیاں ہَیں؟  



مَیں تو مُشْتاق  
یہ پھاسلے یہ فِراک  
تُو تو بیمُروّت  
میری جُونُون ہر وقْت  


ربّا! یہ ماجرا کْیاں ہَیں؟  



کبھی تو پُوچھو مُدّے-ہال کْیاں ہَیں

 گرہن ग्रहण 


क्यों ये बातें
बीतती रातें
होने दो ये बातें
बे-इन्तहा
होने दो ये बातें
मैं तनहा
क्यों मैं खड़ा हूँ
तुझसे दूर
क्यों तुम खड़े हो
मुझसे दूर

क्यों करुँ रुस्वा
तुझे मेरी बेवफा
क्यों करू मुत्तिला
इस अज़ाब में शुमार

मेरी ये  झूटी बातें
क्यों बांधे ये रिश्तों की डोर
तेरे  ये मोह के धागे
क्यों पिरोये ये लहासिल ख्वाबें

कसमें क्यों खाएं
प्यार को साबित
सच्चाइयों क्यों बहाए
ऐतबार की उम्मीद

खुदाया !
ये कौन सी माजरा
करीबियां में भी ये दूरियां
मिठास में भी ये कडुवाहट

मेरी अना
यह गिरहन
नायाब सी जस्बा
मेरी बेबस अंतर्मन
Batein

क्यों ये बातें 
बीतती रातें 
होने दो ये बातें 
बे-इन्तहा 
होने दो ये बातें 
मैं तनहा 
क्यों मैं खड़ा हूँ 
तुझसे दूर 
क्यों तुम खड़े हो 
मुझसे दूर

क्यों करुँ रुस्वा 
तुझे मेरी बेवफा 
क्यों करू मुत्तिला 
इस अज़ाब में शुमार 

मेरी ये  झूटी बातें 
क्यों बांधे ये रिश्तों की डोर 
तेरे  ये मोह के धागे 
क्यों पिरोये ये लहासिल ख्वाबें 

कसमें क्यों खाएं 
प्यार को साबित 
सच्चाइयों क्यों बहाए
ऐतबार की उम्मीद 

खुदाया !
ये कौन सी माजरा 
करीबियां में भी ये दूरियां 
मिठास में भी ये कडुवाहट 

मेरी अना 
यह गिरहन 
नायाब सी जस्बा 
मेरी बेबस अंतर्मन 

बीतती रातें
अंगड़ाईयाँ
होने दो बातें
बे-इन्तहा
होने दो बातें
में तनहा

इतनी करीब तो हम आये
फिर भी क्यों में दूर
पास की मिठास
में भी कडुवाहट की आहट
क्यों खड़े हैं में
तुमसे इतनी दूर

मेरी झूठी बातें
कसमें वायदे
तेरे मोह के धागों से क्यों
पिरोये लहासिल सपने

तू होगा ज़रा पागल
तूने मुझको  ही चुना
कितनी इन्तेबा
मेरी इत्तिला


तुझे इख्तियार
हर पल हर लम्हा
आज़ाद आजमां
उड़ने की तेरी ख्वाइश

मेरी अना
गिरहती
यह  नायाब सी जस्बा
मेरा अंतर्मन बेजब्रा

मेरी ये झूटी माहजरत
लफ़्ज़ों की धोखेबाज़ी
फिर भी मुमकिन हो तो
मुझे मुआफ करे

यूँ ही कोशिश
सूनी  कशिश


Chit-Chakor

नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  संदेसा  सुन
मम मन गाए

नयन कर पाद झूमे नाचे
मोरे अंग अंग सुगन्धित
रोम रोम तोहरे गुण गाये
मन  बेबस बावरा बन जावे

घनश्याम मेघ बन
मन-मोहन मन में
नीर समीर घने
अलबेला सजन आयो

बूंध बूंध विष चख-दिखे
कतरा कतरा कांप उठे
ह्रदय मुकुर फट फूटे
प्रलय अकाल टूट पड़े

कित घन बरसे
जित तुझ चाहे
मोरा ह्रदय आहे
मत मम चौकट आवे

मरू मरू लांघे
सूना सूना लागे
कंट -कांटा सूखे
कतई तुझ ढूंढ जावे


नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  सन्देशा  सुन
मम मन गाए

jugni

ज़रा बक्श दे
मेरे हम-जाए

जनिजार क्यों
फ़िदा वहां
यहाँ नहीं
तसव्वुर नहीं

वाजिब इश्क़
बेखुदा का नमाज़
दिली मुहब्बत
कुफ्राना नीघमत

तेरे नूर में
मेरे सवेरे बे-आबरू
तेरी इंतज़ार में
मेरे शब की रौनक

जुगनी
तेरी झलक
कुर्बान
चांदनी में धुली मैं

तेरा याराना
मेरी हमनशीं
तेरी ज़िक्र
मेरी बेईमानी


गिरते फ़रिश्ते
अर्श से फर्श
कानून कायदे
जूनून कायम


तेरे तकाज़े जॉइस
तेरा रुतबा आला
ज़रा वक़्त दे
मेरे हमनफस


जानां
जान-ए - जानाँ
यह तमाम
 कायनात में...
..

Wazifa


چہروں کی جھلک 
کھویا کھویا چاند 
اجلا اجلا سورج
واہیاد نذرانے
بیخدے تقاضے

میری آنکھوں سے اڑتے پردے 
میری نفس کو کیوں نہیں پتہ ؟
شر کہاں خیر کہاں ؟
چراغ اے -کائنات کے اشارے کہاں؟
حافظ کی ساتھ کہاں 
کہاں راہ تو پھڑکے 
مجھے علم ہیں ضرور 
کیوں نہ پتہ چلے
اک پل اجیالا
اک پل اندھیالا 
میری راہ -اے -حق
نئی دنیا کے سپنے 
وقت کی نئے آزادیاں
مستقبل کے قانون قاعدے 
آج فضول بنے
مستقبل کی کھوائش 
ترساکے ترساکے
حال جنت کیا بنے؟
آنکھ کھولے
اک پل 
حسیں عالم 
خوشیاں بیشمار 
آنکھیں موندے
اک پل 
میری دریاٴ زندگی 
بیہک جاتی بہتی خودغرض 
ہرگز نہ لازمی 
اندھے سرمیی آنکھیں 
نئی ریت نوی رواز'
سب صحیح غلط لگتی 
سب غلط تو بیشک صحیح بن گئے 
میں تو بدنصیب 
میری ارج انہوں نے سنا کیا؟
ارے عرش کے پھولوں!
میں تو نکما 
میری درخواست انہوں نے کبھی نکھار تو صحیح؟
ارے جنی قوم کے ہمارے سگے !

جسم کے کرم 
جی کی کلام 
جگر کے دھوکے 
کافروں کی نماز 
سجدے بے احساس 
میری فترت ویسے کی ویسے 
میری کوششیں کشش 
کاش نہ ہو جاتے 
نہ سن پاتا
تیرے اشارے
میری زبان میں تیری تلوات
کب کا کا کب چوک پڑے



जिस्म की महक
चेहरों की झलक 
खोया खोया चाँद 
उजला उजला सूरज
वाह्याद  नज़राने
बेख़ुदे तक़ाज़े

मेरी आँखों से  उड़ते परदे 
मेरी नफ़स को क्यों नहीं  पता ?
शर्र  कहाँ खैर कहाँ ?
चिराग़-ए -कायनात के इशारे कहाँ?
हाफ़िज़ की साथ कहाँ ?
राह तो फड़के 
मुझे इलम हैं ज़रूर  
क्यों ना पता चले

इक पल उजयाला
इक पल अंधियाला 
मेरी  राह  -ए -हक़
नयी दुनिया के सपने 
वक़्त की नये आज़ादीयां
मुस्तक़बिल के क़ानून  कायदे 
आज फ़िज़ूल बने
मुस्तक़बिल  की ख्वाइश 
तरसाके  तरसाके
हाल  जन्नत क्या बने?
आँख खोले
इक पल 
हसीं आलम 
खुशियां बेशुमार 
आँखें मूंदे
इक पल  
मेरी  दरिया-ए-ज़िन्दगी 
बेहक  जाती बहती खुदगर्ज़ 
हरगिज़ न लाज़मी  
अंधे  सुरमयी आँखें 
नयी रीत नवी रिवाज़'
सब सही गलत लगती 
सब  गलत तो बेशक  सही बन गए 
में तो बदनसीब 
मेरी अरज उन्होंने सुना क्या?
अरे अर्श के फूलों!
में तो निकम्मा 
मेरी दरख्वास्त  उन्होंने कभी निखार तो सही?
अरे जिन्नि क़ौम  के  हमारे सगे !

जिस्म के करम 
जी की कलाम 
जिगर के धोखे 
काफिरों की नमाज़ 
सजदे बे-एहसास 
मेरी फ़ित्रत वैसे की वैसे 
मेरी कोशिशें कशिश 
काश  न हो जाते 

Aaina

Baatein  Muzalzal Baatein
Hum Deewane Apne Paraye
Ajnabi Matlabi Waqti Taqaze

Baatein Muzalzal Bataein
Karein Kisse?  
Doonda Maghrib Mashriq
Nawazi Gunjaish

Baatein Muzalzal Baatein
Yar-e Gaar Dilbar
Ashnai Aaina 
Aaina-e-Umr-e-Guzishta 
Aaina-e-Haal
Aaina-e- Mustaqbil 

Alfaz-e-Altaf

Moohana (Delta)

Sayyar
Har Rah Har Raasta
Dariya Ban Baha 
BeManzil BeIkhtiyar
 
Karwaan Mahal
Safar Apheem
Mast Qalandar
Dariya Dervish

Ab Tu Talaab Ban
Tu Samandar Ban
Lehar Ban Umad 
Saahil Bane Aashique

Dariya Kinara Ek Shab
Samandar Saahil Shereek-e-Hayaat
Aam Khaas Ban
Uroob Umeed Ban
Rozmarra Dhadkan Ban 
                                                Alfaz-e-Altaf

Bharahm

 Ya Humsafar! Teri Yeh Muskurahat

Har Ulajh par Barkaraar

Raat, Khauf, aur Tauba ki Aansoo

Khudaya! Yeh Rehmat ki Barsaat

Rabba Sacheya ! Tera Karam Mera Bharahm!