Saturday, November 19, 2016

Wazifa


چہروں کی جھلک 
کھویا کھویا چاند 
اجلا اجلا سورج
واہیاد نذرانے
بیخدے تقاضے

میری آنکھوں سے اڑتے پردے 
میری نفس کو کیوں نہیں پتہ ؟
شر کہاں خیر کہاں ؟
چراغ اے -کائنات کے اشارے کہاں؟
حافظ کی ساتھ کہاں 
کہاں راہ تو پھڑکے 
مجھے علم ہیں ضرور 
کیوں نہ پتہ چلے
اک پل اجیالا
اک پل اندھیالا 
میری راہ -اے -حق
نئی دنیا کے سپنے 
وقت کی نئے آزادیاں
مستقبل کے قانون قاعدے 
آج فضول بنے
مستقبل کی کھوائش 
ترساکے ترساکے
حال جنت کیا بنے؟
آنکھ کھولے
اک پل 
حسیں عالم 
خوشیاں بیشمار 
آنکھیں موندے
اک پل 
میری دریاٴ زندگی 
بیہک جاتی بہتی خودغرض 
ہرگز نہ لازمی 
اندھے سرمیی آنکھیں 
نئی ریت نوی رواز'
سب صحیح غلط لگتی 
سب غلط تو بیشک صحیح بن گئے 
میں تو بدنصیب 
میری ارج انہوں نے سنا کیا؟
ارے عرش کے پھولوں!
میں تو نکما 
میری درخواست انہوں نے کبھی نکھار تو صحیح؟
ارے جنی قوم کے ہمارے سگے !

جسم کے کرم 
جی کی کلام 
جگر کے دھوکے 
کافروں کی نماز 
سجدے بے احساس 
میری فترت ویسے کی ویسے 
میری کوششیں کشش 
کاش نہ ہو جاتے 
نہ سن پاتا
تیرے اشارے
میری زبان میں تیری تلوات
کب کا کا کب چوک پڑے



जिस्म की महक
चेहरों की झलक 
खोया खोया चाँद 
उजला उजला सूरज
वाह्याद  नज़राने
बेख़ुदे तक़ाज़े

मेरी आँखों से  उड़ते परदे 
मेरी नफ़स को क्यों नहीं  पता ?
शर्र  कहाँ खैर कहाँ ?
चिराग़-ए -कायनात के इशारे कहाँ?
हाफ़िज़ की साथ कहाँ ?
राह तो फड़के 
मुझे इलम हैं ज़रूर  
क्यों ना पता चले

इक पल उजयाला
इक पल अंधियाला 
मेरी  राह  -ए -हक़
नयी दुनिया के सपने 
वक़्त की नये आज़ादीयां
मुस्तक़बिल के क़ानून  कायदे 
आज फ़िज़ूल बने
मुस्तक़बिल  की ख्वाइश 
तरसाके  तरसाके
हाल  जन्नत क्या बने?
आँख खोले
इक पल 
हसीं आलम 
खुशियां बेशुमार 
आँखें मूंदे
इक पल  
मेरी  दरिया-ए-ज़िन्दगी 
बेहक  जाती बहती खुदगर्ज़ 
हरगिज़ न लाज़मी  
अंधे  सुरमयी आँखें 
नयी रीत नवी रिवाज़'
सब सही गलत लगती 
सब  गलत तो बेशक  सही बन गए 
में तो बदनसीब 
मेरी अरज उन्होंने सुना क्या?
अरे अर्श के फूलों!
में तो निकम्मा 
मेरी दरख्वास्त  उन्होंने कभी निखार तो सही?
अरे जिन्नि क़ौम  के  हमारे सगे !

जिस्म के करम 
जी की कलाम 
जिगर के धोखे 
काफिरों की नमाज़ 
सजदे बे-एहसास 
मेरी फ़ित्रत वैसे की वैसे 
मेरी कोशिशें कशिश 
काश  न हो जाते 

Friday, May 27, 2016

Jugni



ज़रा बक्श दे
मेरे हम-जाए

जनिजार क्यों
फ़िदा वहां
यहाँ नहीं
तसव्वुर नहीं

वाजिब इश्क़
बेखुदा का नमाज़
दिली मुहब्बत
कुफ्राना नीघमत

तेरे नूर में
मेरे सवेरे बे-आबरू
तेरी इंतज़ार में
मेरे शब की रौनक

जुगनी
तेरी झलक
कुर्बान
चांदनी में धुली मैं

तेरा याराना
मेरी हमनशीं
तेरी ज़िक्र
मेरी बेईमानी


गिरते फ़रिश्ते
अर्श से फर्श
कानून कायदे
जूनून कायम


तेरे तकाज़े जॉइस
तेरा रुतबा आला
ज़रा वक़्त दे
मेरे हमनफस


जानां
जान-ए - जानाँ
यह तमाम
 कायनात में...

Wednesday, May 18, 2016

Chit-Chakor चित- चकोर

नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  संदेसा  सुन
मम मन गाए

नयन कर पाद झूमे नाचे
मोरे अंग अंग सुगन्धित
रोम रोम तोहरे गुण गाये
मन  बेबस बावरा बन जावे

घनश्याम मेघ बन
मन-मोहन मन में
नीर समीर घने
अलबेला सजन आयो

बूंध बूंध विष चख-दिखे
कतरा कतरा कांप उठे
ह्रदय मुकुर फट फूटे
प्रलय अकाल टूट पड़े

कित घन बरसे
जित तुझ चाहे
मोरा ह्रदय आहे
मत मम चौकट आवे

मरू मरू लांघे
सूना सूना लागे
कंट -कांटा सूखे
कतई तुझ ढूंढ जावे


नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  सन्देशा  सुन
मम मन गाए


Sunday, May 15, 2016

گرہن ग्रहण

बीतती रातें
अंगड़ाईयाँ
होने दो बातें
बे-इन्तहा
होने दो बातें
में तनहा

इतनी करीब तो हम आये
फिर भी क्यों में दूर
पास की मिठास
में भी कडुवाहट की आहट
क्यों खड़े हैं में
तुमसे इतनी दूर

मेरी झूठी बातें
कसमें वायदे
तेरे मोह के धागों से क्यों
पिरोये लहासिल सपने

तू होगा ज़रा पागल
तूने मुझको  ही चुना
कितनी इन्तेबा
मेरी इत्तिला


तुझे इख्तियार
हर पल हर लम्हा
आज़ाद आजमां
उड़ने की तेरी ख्वाइश

मेरी अना
गिरहती
यह  नायाब सी जस्बा
मेरा अंतर्मन बेजब्रा

मेरी ये झूटी माहजरत
लफ़्ज़ों की धोखेबाज़ी
फिर भी मुमकिन हो तो
मुझे मुआफ करे

यूँ ही कोशिश
सूनी  कशिश


Thursday, February 18, 2016

इल्तिजा -Iltija


मुझे क्या इल्म ?
मैंने  तुझे ही ढूँढा
तू थी मेरी मंज़िल
मुझे तो नहासिल
मेरी ज़ोहद
मेरी मकसद


मुझे क्या हासिल ?
बेतलब बलुतुफ
यह फड़कना फिरना
यह फसना रुलना
बेमौका बेइन्तहा
बेइम्तियाज़  बे-इक़तियार

यह मेरी  फित्रत
न यह मेरी हज़रत
क्या मैं मानूँ ?
यह सही यह गलत
यह होनी यह अनहोनी
मेरी इर्द गिर्द
यह मेरी ज़वाब
या यह मेरी नसीब

न यह ज़ुल्म  मुझपे
तौबा !!न तुम ज़ालिम
न मैं मज़लूम
लेकिन यह शिकवा
मुझसे तू क्यों खफा
वजह मेरी घटती वफ़ा

कैसे इज़हार करू ?
मेरी यह इल्तिजा
यह बेज़ुकूनी बेज़ारी
यह बेकशी बेबसी
तुझपे  क्या असर
तू रूह -ए -संसार

तेरी इक़रार
तेरी इंकार
हर हाल मंज़ूर
मैं मुकम्मल ज़बूर
पर उम्मीद बेशुमार
इस अब्दल की हक़
हर धड़कन की दस्तक

मेरी यह दर-खास्त
तुम्हारे दरवाज़े
मेरी यह इल्तिजा
तेरे पैरों तले

हर मेरा दस्तूर बेअसर न हो जाए ?
हर मेरा फितूर बेमतलब न  हो जाए ?
हर अमल तुझसे क्यों झोड़ती नहीं बरकरार?
हर खता तुझसे क्यों तोड़ती हैं ज़रूर?

यह डोर हलकी सी डोर
यह रास्ता तेरे वास्ता
थी मेरी ख्वाब
मुस्तक़ीम
पर मेरी नसीब
जहन्नुम

रब्बा! यह माजरा क्यां हैं ?
कभी तो पूछो मुद्दे -हाल क्यां हैं ?

मैं तो मुश्ताक़
यह फासले यह फ़िराक
तू  तो बेमुरव्वत
मेरी जूनून हर वक़्त

रब्बा! यह माजरा क्यां हैं ?
कभी तो पूछो मुद्दे -हाल क्यां हैं ?


اِلْتِجا  


مُجھے کْیا اِلْم؟  

مَیننے تُجھے ہی ڈھُونڈھا  
تُو تھی میری منذِل  
مُجھے تو نہاسِل  
میری ذوہد  
میری مکسد  




مُجھے کْیا ہاسِل؟  

بیتلب بلُتُپھ  
یہ پھڑکنا پھِرنا  
یہ پھسنا رُلنا  
بیمَوکا بیءنْتہا  
بیءمْتِیاذبی-ءقتِیار  


یہ میری پھِترت  
ن یہ ایری ہذرت  
کْیا مَیں مانُوں؟  

یہ سہی یہ گلت  
یہ ہونی یہ انہونی  
میری اِرْد گِرْد  
یہ میری جواب  
یا یہ میری نسِیب  


ن یہ ذُلْم مُجھپے  
تَوبا!! ن تُم ذالِم  
ن مَیں مذلُوم  
لیکِن یہ شِکوا  
مُجھسے تُو کْیوں کھپھا  
وجہ میری گھٹتی وفا  


کَیسے اِذہار کرُو؟  

میری یہ اِلْتِجا  
یہ بیذُکُونی بیذاری  
یہ بیکشی بیبسی  
تُمپے کْیا اسر  
تُو میرے رُوہ-ءی-سنسار  


تیری اِقرار  
تیری اِنکار  
ہر ہال منذُور  
مَیں مُکمّل ذبُور  
پر اُمِّید بیشُمار  
اِس ابْدل کی ہق  
ہر دھڑکن کی دسْتک  


میری یہدر-کھاسْت  
تُمھارے درواذے  
میری یہ اِلْتِجا  
تیرے پَیروں ٹیل  


ہر میرا دسْتُور بیاسر ن ہو؟  

ہر میرا پھِتُور بیمتلب ن ہو؟  

ہر امل تُجھسے کْیوں جھوڑتی نہِیں برکرار؟  

ہر کھتا تُجھسے کْیوں توڑتی ہَیں ذرُور؟  



یہ ڈور ہلکی سی ڈور  
یہ راسْتا تیرے واسْتا  
تھی میری کھْواب  
مُسْتقِیم  
پر میری نسِیب  
جہنُّم  


ربّا! یہ ماجرا کْیاں ہَیں؟  

کبھی تو پُوچھو مُدّے-ہال کْیاں ہَیں؟  



مَیں تو مُشْتاق  
یہ پھاسلے یہ فِراک  
تُو تو بیمُروّت  
میری جُونُون ہر وقْت  


ربّا! یہ ماجرا کْیاں ہَیں؟  

کبھی تو پُوچھو مُدّے-ہال کْیاں ہَیں؟

Sunday, February 7, 2016

مجھدار Majdhaar

मोरा करम 
तोहरा रहम 
मझधार  पे रखत तू मुझे सही 
ज़ेहर- शहद फरक जानत नहीं 
ज़िन्दगी के रोशन सपने दिखावत 
मोहे बंदगी यह मुर्दगी समेत 
बेबस बेज़ार मोरा रूह  खुलावत 
असीम अपार तोहरे रहम की उम्मीद 
मोरा करम 
तोहरा रहम 

موڑا کرم 
تھوھرا رحم 
مجھدار پی رکہت تو  مجھے سہی 
سہار شاد فراک جانت نہیں 
زندگی کے روشن سپنے دکھاوٹ 
موہے بندھاگی یہ مردگی سمیت 
بےبس بیزار موڑاروح  خلوت 
اثیم اپار ٹھرے رحمکی امید 
موڑا کرم 
تھوھرا رحم