Friday, May 27, 2016

Jugni



ज़रा बक्श दे
मेरे हम-जाए

जनिजार क्यों
फ़िदा वहां
यहाँ नहीं
तसव्वुर नहीं

वाजिब इश्क़
बेखुदा का नमाज़
दिली मुहब्बत
कुफ्राना नीघमत

तेरे नूर में
मेरे सवेरे बे-आबरू
तेरी इंतज़ार में
मेरे शब की रौनक

जुगनी
तेरी झलक
कुर्बान
चांदनी में धुली मैं

तेरा याराना
मेरी हमनशीं
तेरी ज़िक्र
मेरी बेईमानी


गिरते फ़रिश्ते
अर्श से फर्श
कानून कायदे
जूनून कायम


तेरे तकाज़े जॉइस
तेरा रुतबा आला
ज़रा वक़्त दे
मेरे हमनफस


जानां
जान-ए - जानाँ
यह तमाम
 कायनात में...

Wednesday, May 18, 2016

Chit-Chakor चित- चकोर

नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  संदेसा  सुन
मम मन गाए

नयन कर पाद झूमे नाचे
मोरे अंग अंग सुगन्धित
रोम रोम तोहरे गुण गाये
मन  बेबस बावरा बन जावे

घनश्याम मेघ बन
मन-मोहन मन में
नीर समीर घने
अलबेला सजन आयो

बूंध बूंध विष चख-दिखे
कतरा कतरा कांप उठे
ह्रदय मुकुर फट फूटे
प्रलय अकाल टूट पड़े

कित घन बरसे
जित तुझ चाहे
मोरा ह्रदय आहे
मत मम चौकट आवे

मरू मरू लांघे
सूना सूना लागे
कंट -कांटा सूखे
कतई तुझ ढूंढ जावे


नित मन तरसे
नित मन प्यासा
चित  चकोर चहके
तन मन रोये

बूँद  बूँद तरसे
बूँद  बूँद प्यासा
सावन  सन्देशा  सुन
मम मन गाए


Sunday, May 15, 2016

گرہن ग्रहण

बीतती रातें
अंगड़ाईयाँ
होने दो बातें
बे-इन्तहा
होने दो बातें
में तनहा

इतनी करीब तो हम आये
फिर भी क्यों में दूर
पास की मिठास
में भी कडुवाहट की आहट
क्यों खड़े हैं में
तुमसे इतनी दूर

मेरी झूठी बातें
कसमें वायदे
तेरे मोह के धागों से क्यों
पिरोये लहासिल सपने

तू होगा ज़रा पागल
तूने मुझको  ही चुना
कितनी इन्तेबा
मेरी इत्तिला


तुझे इख्तियार
हर पल हर लम्हा
आज़ाद आजमां
उड़ने की तेरी ख्वाइश

मेरी अना
गिरहती
यह  नायाब सी जस्बा
मेरा अंतर्मन बेजब्रा

मेरी ये झूटी माहजरत
लफ़्ज़ों की धोखेबाज़ी
फिर भी मुमकिन हो तो
मुझे मुआफ करे

यूँ ही कोशिश
सूनी  कशिश